अंधानुकरण पश्चिम का छोड़ो

अंधानुकरण पश्चिम का छोड़ो, नहीं अपनी संस्कृति से मुँह मोड़ो। बिगड़ गये हैं खान पान, बढ़ गई हैं उच्छ्खलतायें। बढ़ गये हैं समाज में पाप कर्म, बलात्कार सी घटनायें। जो करते नारी को शर्मसार, ऐसे पापिष्ठों से नाता तोड़ो..................... अंधानुकरण............। करो न अवमूल्यन भारतीय संस्कृति का, करो कुछ विचार मन में सुकृति का। नहीं आने दो जीवन में उन्मुक्तता। नहीं अपनाओ स्वेच्छाचारिता। मान्यता- बर्जनाओं को ठुकराकर, नहीं कर्म भाग्य अपने फोड़ो..................... अंधानुकरण............। असंमयित यौनाचार से देश में, बढ़ती जाती है आबादी। कहते हैं लोग हो रही प्रगति, मुझको तो लगती है बर्वादी। बढ़ती जनसंख्या है विकट समस्या, इसे रोकने को लोगों के मन झकझोरो........ अंधानुकरण............। बढ़ती जनसंख्या के सापेक्ष पैदा करने होंगे संसाधन, देने को रोजगार रिहाइश कटते जायेंगे हरियाले वन। उगते जायेंगे कंक्रीट के जंगल हरीतिमा को तरसेंगे मन, जलवायु प्रदूषित हो जायेंगे, बढ़ जायेगी सांसों की घुटन। भारतीय जीवन शैली अपना कर, आबादी सीमित करो निगोड़ो..................... अंधानुकरण............।

जयन्ती प्रसाद शर्मा

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